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बहरे गूंगों को बोलना कैसे सिखाया जाता है | क्या जन्मजात बहरे गूंगों का इलाज संभव है | कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी क्या है ?

 बहरे - गूंगों को ' बोलना ' कैसे सिखाया जाता है ?

  

बहरे गूंगों को बोलना कैसे सिखाया जाता है,क्या जन्मजात बहरे गूंगों का इलाज संभव है,कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी क्या है, क्या बहरे गूंगे दोबारा बोल सकते है, ब्रेल पद्धति क्या है, साइन लैंग्वेज क्या होता है, मूक बधिर बच्चों की जानकारी, https://www.discoveryworldhindi.com


एक विद्यार्थी ने अपने टीचर से पूछा, " सर वह लोग जो सुन नहीं सकते तथा बोल नहीं पाते किस तरह से बोलना सीखते हैं ? 



टीचर ने उत्तर दिया, "यह विचार जेरोम कोर्डान नामक एक इतालवी डाक्टर का था कि ऐसे लोगों को लिखे शब्दों के माध्यम से सिखाया जाए । यह बात 16 वीं शताब्दी की है । लगभग 100 वर्ष बाद ' फिंगर अल्फाबेट ' का विकास किया गया ताकि उंगलियों के माध्यम से अक्षर बनाए जा सकें तथा उनसे आगे शब्द बनाए जा सकें ।        




" अश्मित ने कहा , " सर , मेरे एक मित्र का भाई गूंगा तथा बहरा है । मेरे मित्र ने मुझे बताया कि तीन उंगलियों से ठुड्डी पर ' टैप ' करने का अर्थ है ' मेरे अंकल ' । " सर ने उत्तर दिया , " हां , यह संकेतों की भाषा है । यदि आप यह कहना चाहते हैं कि आप मुझसे सच नहीं कह रहे हैं तो आपको अपनी तर्जनी उंगली को अपने होंठों के आगे से फिराना होगा। 




इस ' वर्णमाला ' से ऐसे लोगों में से कई एक मिनट में 130 तक शब्द समझा सकते हैं । आज इनमें से बहुत से लोग बोलने वाले के होंठों को देख कर उसका अर्थ समझना सीख गए हैं । आजकल सुनने में सहायता करने वाले उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है । " 




शारीरिक रूप से अन्य बच्चों से अलग होने के कारण मूक बधिर बच्चों को पढ़ाना बहुत ही कठिन कार्य होता है लेकिन अध्यापकों द्वारा धीरे-धीरे इनके ज्ञान में वृद्धि की जाती है । जिसके कारण यह बच्चे वस्तुओं को उसके नाम से पहचान कर पाने में समर्थ हो जाते हैं। 




अध्यापकों द्वारा गूंगे बहरे बच्चों को साइन लैंग्वेज के द्वारा पढ़ाया जाता है जिसके अंतर्गत विभिन्न वस्तुओं का फोटो दिखाकर बच्चों के ज्ञान में वृद्धि की जाती है अगर किसी बच्चे को फलों और सब्जियों के बारे में बताना हो तो पहले फलों या सब्जियों की फोटो दिखाई जाती है और उनके नाम को लिखा जाता है । 




जिससे बच्चों को पता लग जाता है कि इस फल का क्या नाम है। मूक बधिर बच्चों के स्कूल में साइन लैंग्वेज सिखाया जाता है । साइन लैंग्वेज एक प्रकार की बॉडी लैंग्वेज होती है। जिसमें हाथों और उंगलियों को अलग-अलग प्रकार से Move किया जाता है। हाथ और उंगलियों की हर एक Movement का कोई ना कोई अर्थ होता है। 




जिसके माध्यम से यह बच्चे एक दूसरे से आसानी से बात कर पाते हैं और दूसरों की बातों को समझ लेते हैं । मूक बधिर बच्चों की तरह नेत्रहीन बच्चों को पढ़ाने के लिए एक विशेष प्रकार की पद्धति अपनाई जाती है । जिसे  ब्रेल पद्धति कहते हैं। इस पद्धति में बच्चों के लिए एक विशेष प्रकार की पुस्तक होती है जिसमें अक्षरों की जगह पर छोटे-छोटे छिद्र वह अक्षरों के उभार होते हैं ।




सामान्य बच्चे जहां अक्षरों को देखकर पढ़ते हैं वही नेत्रहीन बच्चे अपनी उंगली के माध्यम से अक्षरों के उभारो को छूकर पढ़ते हैं। इस पद्धति को ब्रेल पद्धति कहते हैं। यह पद्धति दुनियाभर में नेत्रहीन बच्चों द्वारा अपनाई जाती है । इस पद्धति के द्वारा बच्चे अक्षरों के उभारो को छूकर पढ़ते व लिखते हैं।





आपको जानकर हैरानी होगी की मूक बधिर बच्चे 10वीं 12वीं यहां तक कि ग्रेजुएशन भी करते हैं । कई मूकबधिर बच्चे सरकारी विभाग में कार्यरत है और अपनी सेवा दे रहे हैं। मूक बधिर बच्चों के लिए भारत सरकार कई प्रकार की योजनाएं चलाती हैं ताकि इन बच्चों का भविष्य उज्जवल बन सके।



क्या मूक बधिर बच्चों का इलाज संभव है ?

समय के साथ-साथ साइंस ने काफी तरक्की की है। आज के समय में जन्मजात जो बच्चे मुक बधिर पैदा होते हैं जो बोलने और सुनने में असमर्थ होते हैं । समय रहते अगर उनका इलाज कर दिया जाए तो वह बोलना और सुनना चालू कर देते हैं । 


कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी क्या है ?

जन्मजात मूक बधर बच्चों को दुबारा सुनने और बोलने के लिए कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी की सहायता ली जाती है । इस सर्जरी में सर्जन द्वारा एक डिवाइस कान के एकदम अंदरूनी हिस्से दिमाग के पास लगाई जाती है। जो भी हम आवाज सुनते हैं वह एक माइक की सहायता से सिगनल्स में कोड करके इलेक्ट्रिक करंट के माध्यम से इस डिवाइस में पहुंचाई जाती है । 



यह डिवाइस कोक्लेयर नर्व को आवाज समझने के लिए उत्तेजित करती है । इस सर्जरी में दो प्रकार के डिवाइस लगाए जाते हैं एक डिवाइस ऑपरेशन द्वारा दिमाग के अंदरूनी हिस्से में लगाई जाती है । जबकि दूसरा डिवाइस कान के पास बाहर लगाई जाती है । बाहरी डिवाइस आवाज को पकड़ करें अंदरूनी डिवाइस के पास भेजती है । 



यह डिवाइस इन सिगनल्स को कोक्लेयर नर्व तक पहुंचाता है । जिससे बच्चा ऑपरेशन के 3 महीने बाद आवाज को समझने और बोलने में समर्थ हो जाता है ।




यह ऑपरेशन 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर अधिक प्रभावशाली होता है । 5 साल से अधिक उम्र के बच्चों में ऑपरेशन करने पर बच्चा आवाज को समझने में तो समर्थ हो जाता हैं लेकिन बोलने में उन्हें मुश्किल आती हैं । इसलिए यह जरूरी है कि कम उम्र में ही इन बच्चों का इलाज करा दिया जाए । 



कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी अभी यह बहुत महंगी सर्जरी मानी जाती है लेकिन मुमकिन है कि आगे चलकर यह सस्ती हो जाए और आम जनमानस तक पहुंच जाएं ।



🙏दोस्तों अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो आप कमेंट करना ना भूलें नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी कीमती राय जरूर दें। Discovery World Hindi पर बने रहने के लिए हृदय से धन्यवाद ।🌺



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बहरे गूंगों को बोलना कैसे सिखाया जाता है | क्या जन्मजात बहरे गूंगों का इलाज संभव है | कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी क्या है ? Reviewed by Jeetender on December 01, 2021 Rating: 5

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