Top Ad unit 728 × 90

Breaking News

InterestingStories

बैंगन का भुर्ता | सरदार ओकापी ने कैसे चाटुकार दरबारियों को सबक सिखाया | चमचों से सावधान | Moral story

बैंगन का भुर्ता



बैंगन का भुर्ता,बाल कहानी, kids Story, Emotional story, Motivational stories, बच्चों की कहानी,राजा की कहानी, प्रेरणादायक कहानी, चमचों से सावधान,hindi stories, नाइजीरिया की लोक कथा, चाटुकारिता, राजदरबारी, brinjal, चमचा किसे कहते हैं, चमचे कौन होते हैं, Discoveryworldhindi.com



नाइजीरिया
की लोक - कथा किसी समय आज के नाइजीरिया की राजधानी कहलाने वाले नगर लागोस पर ओकापी नामक आदिवासी राजा का शासन था । ओकापी बहुत वीर और बलशाली राजा था । उसने छोटे - छोटे कबीलों को मिला कर अपना राज्य स्थापित किया था । 



लेकिन ओकापी के राजा बनते ही उसके इर्द - गिर्द खुशामदी लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी । वे बात - बात पर राजा की तारीफ करते थे । ओकापी को यह सब बुरा लगता था । वह वीर प्रवृत्ति का व्यक्ति था । उसे इस प्रकार की चाटुकारिता तथा खुशामद से सख्त नफरत थी । 



लेकिन उसके मना करने के बावजूद वे लोग अपनी आदत से बाज नहीं आते थे । चाह कर भी ओकापी उनके साथ सख्ती नहीं कर पाता था परन्तु चाटुकारिता से वह परेशान भी बहुत था । राजा जब अधिक परेशान हो गया तो एक दिन उसने अपने गुरु के पास जा कर परामर्श करने का निश्चय किया । 



वह किसी तरह उन खुशामदी लोगों से छुटकारा पाना चाहता था। पर छुटकारा पाने के लिए यह जानना बहुत जरूरी था कि कौन - कौन खुशामदी हैं ? ऐसे लोगों का पता लगाने का उपाय राजा ओकापी की समझ में नहीं आ रहा था । इसलिए उसने गुरु की शरण में जाने का निश्चय किया था । 



उसका गुरु दूर एक जंगल में कुटिया बना कर रहता था । ओकापी ने उसके पास जा कर अपनी मनोव्यथा कह सुनाई । गुरु बोला , " सुनो , मैं तुम्हें खुशामदी लोगों से छुटकारा पाने का एक आसान - सा उपाय बताता हूं । मेरी बात ध्यान से सुनना । " गुरु की बात सुन ओकापी की खुशी का ठिकाना न रहा । 



उसने गुरु को प्रणाम किया और अपने किले में लौट आया । अगले दिन सवेरे उसने नाश्ते में बैंगन का भुर्ता बनाने का आदेश दिया । रसोइये ने बड़ी लगन से बैंगन का भुर्ता बनाया और नाश्ते के समय राजा के सम्मुख पेश कर दिया । भुर्ता सचमुच स्वादिष्ट था । 



राजा चाव से खाने लगा और खाते वक्त बीच - बीच में तारीफ भी करता जाता । नाश्ते के कक्ष में राजा के दरबार के कई खुशामदी लोग भी मौजूद थे । उन्होंने जब ओकापी को भुर्ते की तारीफ करते देखा तो भला वे क्यों चुप रहते । वे सब भी हां - में - हां मिलाने लगे । " हां , वीर सरदार ! बैंगन का भुर्त बड़ा स्वादिष्ट होता है । 



इसके खाने से शरीर अधिक बलशाली होता है । " एक दरबारी बैंगन की प्रशंसा के पुल बांधता हुआ बोला । ओकापी ने सुना तो उसके होंठों पर मुस्कान थिरक आई । 



नाश्ते के कक्ष में राजा के दरबार के कई खुशामदी लोग भी मौजूद थे । उन्होंने जब ओकापी को भुर्ते की तारीफ करते देखा तो भला वे क्यों चुप रहते । वे सब भी हां - में - हां मिलाने लगे ।



वह जोर-जोर से खिलखिला कर हंसने लगा । अन्य खुशामदियों ने राजा को हंसते देखा तो उनसे भी न रहा गया । वे भी जोर - जोर से हंसने लगे । ओकापी ने नाश्ता खत्म कर लिया और आराम से बैठ गया । अभी कुछ ही समय गुजरा था कि राजा पेट पर हाथ फेरते हुए दर्द से कराहने लगा । 



खुशामदियों ने अवसर अनुकूल पाया । वे पास खिसक आए और सहानुभूति पूर्वक पूछने लगे , " हे सरदार ! आपको अचानक क्या हो गया ? " ओकापी बोला , " लगता है , बैंगन का भुर्ता खाने से पेट में दर्द हो गया है । " एक खुशामदी तुरन्त बोला , " बैंगन का भुर्ता कभी नहीं खाना चाहिए । यह वादी करता है । "  



दूसरा बोला , " मैं तो वीर सरदार को सुझाव दूंगा बैंगन की खेती पर ही पाबंदी लगा  दी  जाए । " तीसरा भला कहां चूकने वाला था । वह बोला , ' हां , बैंगन एक निकृष्ट सब्जी है । " ओकापी का चेहरा क्रोध से लाल हो गया । वह चीख कर बोला , " खामोश ! अभी थोड़ी देर पहले तो तुम सब बैंगन की तारीफ करते नहीं थक रहे थे , अब बुराई शुरू कर दी ! "



चाटुकार दरबारियों के चेहरे  शर्म से पीले पड़ गए । वे अपने चेहरे छुपाने लगे । एक दरबारी ने साहस एकत्र करके कहा , " सरदार ! हम तो आपके मन देख कर बातें करते हैं । " दूसरा बोला , " आपको खुश रखना ही तो हमारा परम कर्त्तव्य है । " तीसरा बोला , " हम आपकी बात कैसे काट सकते हैं । " 



" तुम लोग हमारे दरबारी हो । हमें सच्चाई से अवगत कराना  तुम्हारा परम कर्त्तव्य है । परन्तु तुम तो अपने स्वार्थ के लिए हमारी खुशामद में लगे रहते हो । तुम लोगों को हमारे दरबारी बने रहने का कोई हक नहीं है । तुम लोग न राज्य के हितैषी हो , न हमारे । " राजा ओकापी क्रोध से बिफर उठे , " गुणहीन लोग चापलूसी करके ही अपना काम चलाते हैं । 



कर्त्तव्यनिष्ठ और कर्मवीर प्राणी को भला ऐसी बातों के लिए समय ही कहां मिल पाता है । " खुशामदी दरबारियों के चेहरे लटक गए । वे समझ चुके थे कि राजा पर उनकी चापलूसी का भेद खुल चुका है । 



अत : उन्होंने वहां से निकल चलने में ही अपनी भलाई समझी । इस घटना के पश्चात सभी चापलूस और खुशामदी लोगों से राजा को हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया । - प्रमोद त्रिवेदी “ पुष्प "




🙏दोस्तों अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो आप कमेंट करना ना भूलें नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी कीमती राय जरूर दें। Discovery World Hindi पर बने रहने के लिए हृदय से धन्यवाद ।


यह भी पढ़ें:-





              💙💙💙 Discovery World 💙💙💙


बैंगन का भुर्ता | सरदार ओकापी ने कैसे चाटुकार दरबारियों को सबक सिखाया | चमचों से सावधान | Moral story Reviewed by Jeetender on January 19, 2022 Rating: 5

No comments:

Write the Comments

Discovery World All Right Reseved |

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.