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क्या है भारत का भविष्यफल 2022 | 2022 में भारत का भविष्यफल शुभ है या अशुभ | ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारत का भविष्य फल 2022

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 
(रूपेश ठाकुर प्रसाद पंचांग)


2022 में भारत का भविष्य फल कैसा होगा,ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारत का भविष्यफल 2022,2022 भारत के लिए शुभ है या अशुभ,भारत की जन्म कुंडली,भारतीय पंचांग


दोस्तों ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह भविष्यवाणियां रूपेश ठाकुर प्रसाद पंचांग में छपी लेख पिछले कई वर्षों से सटीक वह सत्य साबित होती आ रही हैं। रूपेश ठाकुर प्रसाद पंचांग भारत का भविष्य फल 2022 इस प्रकार से है ।





संवत् 2079 का आगमन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा , 2 अप्रैल शनिवार , सन् 2022 ई . से हो रहा है । संवत् 2079 सन् 2022 में ' राक्षस ' नामक संवत्सर होगा । नित्य संकल्प विनियोगादि में ' राक्षस ' नामक संवत्सर का ही प्रयोग होगा । इस वर्ष में राजा का पद सूर्य पुत्र ' शनिदेव ' को मिला है । मंत्री पद का अधिकार देव गुरु के अधीन है । 





वर्षेश पति शनि के काल में वर्षा अल्प होगी । शासकों में आपसी संघर्ष , चोरों का भय तथा भूख से जन सामान्य को कष्ट होगा । जनता में भयंकर रोग फैलने की सम्भावना है । मंत्री पद पर आसीन गुरुदेव शुभ फल कारक हैं । केन्द्र व राज्यों के मध्य संवैधानिक नीति तथा जनअधिकारों को लेकर मतभेद होगा । विश्व में किसी प्रमुख राष्ट्र में परिस्थितियाँ जनअनुकूल नहीं होंगी । प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों तथा नेतृत्व पर गंभीर आरोप तथा उनका अपमान होगा । 





आपातकालीन व्यवस्था के विरुद्ध जनआन्दोलन तथा असहयोग होगा । प्रमुख राष्ट्रों के मुद्रा विनिमय पर प्रतिकूलता होगी । विकसित राष्ट्रों पर ऋणभार बढ़ेगा । शिशुओं - बालकों को ज्वरादि रोग से क्षति होगी । जलीय आपदा अथवा किसी खदान दुर्घटना में जन - धन की क्षति संभव है । शिक्षण संस्थानों में अराजकता होगी । किसी विशिष्ट वृद्ध व्यक्ति के निधन का शोक होगा । 





विश्व के प्रमुख शेयर बाजारों में अस्थिरता होगी । वित्तसंस्थानों में कपट की घटनायें तथा संसाधनों की क्षति होगी । तापमान में वृद्धि होगी । क्रूड ऑयल के मूल्यों में अल्प मूल्यवृद्धि संभव है । प्रमुख राष्ट्रों के मध्य शान्तिवार्ता असफल होगी । सीमाओं पर युद्धजनित परिस्थितियाँ तथा सैन्य संघर्ष संभव है । परिवहन तथा संचार क्षेत्र प्रगति होगी । 





भारत में प्रकाशकों तथा बौद्धिक विचारों के अधिकारों को संचित किया जायेगा । पर्यावरण संरक्षण तथा जलसंर्वद्धन के प्रयास होंगे । पूँजी निर्माण हेतु विनिवेश का प्रयास तथा विदेश नीति पर दबाव होगा । व्यापार व पूँजी निवेश में मन्दी रहेगी । कुछ देशों के साथ व्यापार नीति पर विवाद व गतिरोध उत्पन्न होगा । निर्यात में कमी होगी । शेयर के मूल्यों तथा मुद्राकोष में कमी होगी । राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा बजट में अत्यधिक व्यय तथा विशेष प्रावधान होगा । 





सामाजिक कल्याण हेतु धन आवंटन में कमी होगी । नवीन करारोपण संभव है । केन्द्र द्वारा आर्थिक सुधार हेतु कठोर निर्णय लेना संभव है । देश के सम्पत्ति तथा सकल घरेलू उत्पादन में कमी आयेगी । बेरोजगारी दर में वृद्धि होगी । पश्चिमोत्तर भाग में आन्दोलन होंगे । किसी प्रमुख राजनैतिक दल में विघटन होगा । देश में संवैधानिक संकट तथा संघर्षात्मक परिस्तिथियाँ उत्पन्न होगी । राज्यसत्ता तथा जनाधिकारों को संचित अथवा केन्द्रीयकृत किया जायेगा । 





मुद्रा अवमूल्यन संभव है । शासकों के समक्ष अनिर्णयात्मक कठिन परिस्तिथियाँ उत्पन्न होगी । सामाजिक संस्थानों , सुधारगृहों तथा चिकित्सालयों में अराजकता बढ़ेगी । कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी । दक्षिण भाग में प्राकृतिक आपदा घटित होगी । ज्वरादि अथवा किसी स्पर्शजनित रोग का प्रकोप होगा । आरोग्यता में कमी तथा मृत्युदरों में वृद्धि संभव है । षडयंत्रकारी घटनाये होंगी । 


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पूर्वोत्तर भाग में युद्धजनित परिस्तिथियाँ उत्पन्न होगी । सैन्य संघर्ष संभव है । आवश्यक वस्तुओं व सुविधाओं की कमी होगी । पश्चिमोत्तर तथा दक्षिण भाग में समुद्री आपदा संभव है । अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार व निर्यात में वृद्धि होगी । आशानुकूल लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होगी । स्त्रियों के प्रति अत्याचार तथा अनैतिक कार्यों में वृद्धि होगी । जनता में सत्ता के प्रति आक्रोश होगा । अपघात तथा अग्निकाण्ड की घटना घटित होंगी । 





सत्तापक्ष को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा । किसी उच्चाधिकारी अथवा शासनकर्त्ता के ऊपर संकट होगा। पूर्वोत्तर भाग में युद्धजनित परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी । यान दुर्घटना एवं प्राकृतिक प्रकोप से हानि संभव है । दक्षिण भाग में राजनैतिक अस्थिरता होगी । अतिवृष्टि के कारण यत्र - तत्र कृषि की क्षति होगी । पूर्वोत्तर में अशांति तथा कष्ट होगा । दक्षिणी भाग में युद्धजनित परिस्थितियाँ होंगी ।  महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति होगी । 





रक्षा व्यय में वृद्धि , चिकित्सकीय सुविधाओं तथा शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जायेगा । करों में वृद्धि होगी । जलीय आपदा से हानि होगी ।  समुद्री क्षेत्र में अपघात होगा । राष्ट्रीय हित में अन्तर्राष्ट्रीय समझौते होंगे । प्रमुख औद्योगिक देशों में व्यापार असंतुलन होगा । पश्चिम भाग में राजनैतिक अस्थिरता संभव है । चिकित्सालयों , सामाजिक तथा धर्मार्थ संस्थाओं की उन्नति होगी । सुरक्षा संबंधी परिस्थितियाँ सुदृढ़ होंगी । 





अधिकारियों के अधिकार में वृद्धि होगी । उद्योग - धन्धों में वृद्धि होगी । विदेशी निवेश तथा निर्यात में वृद्धि होगी । अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होगी । राष्ट्र की सम्पतिक स्थिति समाधान कारक होगी । शेयर बाजार में तेजी आयेगी । पशुओं को रोग होंगे । हिंसक घटनाएँ , स्त्रीयों तथा बालकों के प्रति अत्याचार होगा । पूर्वी प्रान्तों में अमानवीय घटनायें होंगी । विश्व के राजनैतिक स्तर में विशेष उतार - चढ़ाव रहेगा। 


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ब्रिटेन , अमेरिका , रूस आदि शक्तिशाली राष्ट्रों में आपसी खिंचाव रहेगा । चीन , अरबराष्ट्र , जापान , अफ्रीकी देशों में जन आन्दोलन और तनाव बढ़ेंगे । राजा शनि मंत्री गुरु होने से आपसी खीचातानी एवं युद्ध का वातावरण बनेगा । दक्षिण प्रान्तों में आपसी मतभेद बढ़कर जनतंत्र में आक्रोश बढ़ेगा । शनि की दृष्टि गुरु पर है । अतः फसलों को कीटाणुओं से हानि होगी । सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य संघर्ष तथा मुस्लिम राष्ट्र ईरान , ईराक , अफगानिस्तान एवं तुर्की आदि में घरेलू फसाद होने से शासकों में चिन्ता बढ़ेगी । 





पर्वतीय क्षेत्र में भूकम्प के झटके लगेंगे । पश्चिमी देशों में कहीं आन्तरिक अशान्ति कहीं दो देशों के सीमा प्रान्तों में झड़प होगी । कहीं प्राकृतिक प्रकोप से जन - धन की हानि होगी । बुध - शुक्र दोनों वृष राशि में आकर कही युद्ध , जनता में कलह - क्लेश का संकेत देते हैं । व्यापारी वर्ग विशेष लाभान्वित रहेंगे । कहीं बाढ़ से खड़ी फसलों को हानि पहुँचेगी । भारत की राजनीति में विशेष कानून व्यवस्था लागू होने से विपक्षी वर्ग तोड़फोड़ की नीति एवं आन्दोलन करेंगे । मंगल - राहु का अंगारक योग बना हुआ है । 





अतः कहीं अग्नि काण्ड से हानि एवं यान दुर्घटना , बाढ़ , भूकम्प से जन - धन की हानि होगी । इस वर्ष के सेनापति कुछ मुस्लिम राष्ट्रों में जन - धन हानि का कारण बनेगा । सूर्य- शुक्र से शनि का सम सप्तक योग यवन राष्ट्रों तुर्की , ईराक व चीन आदि में शासक विरोधी तत्त्व बढ़कर रक्तपात , उत्पात एवं हिंसक घटनाओं से प्रजा में दहशत बढ़ेगी । सिंह राशि में बुध के गोचर से किसी देश के प्रधान नेता के स्वास्थ्य में विशेष खराबी आयेगी । 





हत्याकाण्ड एवं दुर्घटनाएँ विशेष होंगी । मीन राशि के गुरु से भारत में नई - नई शिक्षा पद्धति को नई दिशा मिलेगी । भारत के सामाजिक एवं शैक्षिणिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए भरसक प्रयास होगा । भारत की प्रभाव राशि मकर का स्वामी शनि पुनः मकर में आ रहा है । अतः किसी सीमा प्रान्त पर आतंकवाद जन्य युद्ध से वातावरण अशान्त होगा । पाश्चात्य राष्ट्रों में जो विशेष शक्तिशाली राष्ट्र है वहाँ पर आतंकवादी हरकतों से हानि व भय व्याप्त होगा । 





यूरोप के कई देशों में भी जनाक्रोश बढ़ेगा । केन्द्र स्थल उत्तर प्रदेश , बिहार के क्षेत्रों में जनता में क्रोधत्व की स्थिति बढ़कर तोड़फोड़ , अग्निकाण्ड से जनधन हानि होगी । बुध - शुक्र से राहु का षडाष्टक योग चीन , जापान , रूस , तिब्बत , वर्मा आदि राष्ट्रों में भूकम्प , भूस्खलन आदि प्राकृतिक प्रकोप से जनधन हानि का योग है । दक्षिणी प्रान्तों में वाहन , यान दुर्घटनायें बढ़ेगी । आतंकवादी गतिविधियों से जनता में भय का वातावरण रहेगा । 





समुद्री तूफान , भूकम्प अन्य विविध आपदाओं , बीमारियों से जनमानस के लिये परेशानी का कारण बनेगा । विश्वशान्ति चिन्तनीय स्थिति में पड़ सकती है । मुस्लिम राष्ट्रों में वातावरण किसी विशेष को लेकर भयंकर युद्ध का कारण बनेगा । लंका , कम्बोडिया , अफगानिस्तान , ईरान , अफ्रीका राष्ट्र व रूस आदि में आन्तरिक स्थिति विषम होगी । भारत में तूफान व कहीं भयंकर प्राकृतिक प्रकोप से विनाश लीला का दृश्य उपस्थित होगा । 





' एकराशौ यदा यान्ति चत्वारि - पंच - खेचराः । ' से कहीं भयंकर युद्ध की संभावना बनेगी । भयंकर जन - धन हानि के संकेत मिलते हैं । भारत के नेतृत्व में परिवर्तन के भी संकेत मिलते हैं । किसी प्रधान शासक अथवा महान पुरुष का निधन अथवा पद त्याग का योग है । शासकों में आपसी कलह होकर मंत्री मण्डल में विवाद व हंगामों का वातावरण रहेगा । जिससे विकास जन्य कामों में रुकावट रहेगी । 


2022 में भारत का भविष्य फल कैसा होगा,ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारत का भविष्यफल 2022,2022 भारत के लिए शुभ है या अशुभ,भारत की जन्म कुंडली,भारतीय पंचांग


शुक्र का धनु राशि में भ्रमण होना मुस्लिम राष्ट्र ईरान , ईराक , पाकिस्तान आदि राष्ट्रों में शासकों के विरोधी तत्त्व पैदा होकर उपद्रव व विग्रह कारक होंगे । बड़ी शक्तियों के समावेश से विश्व की प्रजा भयभीत रहेगी । सूर्य - राहु का षडाष्टक योग होने से प्रान्तीय राज्यों में परिवर्तन तथा राजनायकों में आपसी मतभेद उभर कर -विवाद होंगे । 




उत्तरी प्रान्तों में प्राकृतिक आपदाओं से जन - धन की हानि सम्भव है ।- रुपेश ठाकुर प्रसाद पंचांग 2022




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क्या है भारत का भविष्यफल 2022 | 2022 में भारत का भविष्यफल शुभ है या अशुभ | ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारत का भविष्य फल 2022 Reviewed by Jeetender on November 12, 2021 Rating: 5

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