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कोहरा क्या होता है | कोहरा कैसे बनता है | बादल फटना क्या होता है | बादल क्यों फटता है | What is Cloud Burst and Fog

 कोहरा क्या होता है ?


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सर्दियों में आप जब सुबह - सुबह घर से बाहर जाते हैं तो कई बार हल्के - हल्के बादल धरती से कुछ ऊपर छाए रहते हैं । इस धुएं जैसे आवरण को धुंध या कोहरा कहते  हैं । ऐसे में जब आपको दूर - दूर तक कुछ दिखाई नहीं देता तो आपके मन में एक प्रश्न जरूर उठता होगा कि आखिर वह धुआं - सा क्या है और कैसे बनता है ? 




आइए आपको हम बताते हैं : कोहरा एक प्रकार का बादल होता है , जो पृथ्वी के सम्पर्क में आ जाता है । कोहरा पृथ्वी की सतह के पास की वायु में उपस्थित पानी के वाष्प के संघनन से बनता है । जब वायु में वाष्पकणों की मात्रा इतनी हो जाती है कि किसी निश्चित तापमान पर अधिक जलवाष्प इसमें नहीं समा सकते तो यह पानी , बर्फ के  बहुत छोटे - छोटे कणों में बदल जाता है । 




जब इन कणों में संतृप्त वायु ठंडी हो जाती है तो इसकी जलवाष्प वहन करने की क्षमता और भी कम हो जाती है इस स्थिति में अतिरिक्त जलवाष्प संघनित हो जाते हैं। जब जलवाष्प का संघनन पृथ्वी के निकट होता है तो यह बादल जैसे रूप में आ जाता है इसी को हम कोहरा कहते हैं। 




सर्दियों के दिनों में सुबह के समय पृथ्वी की सतह ठंडी होती है , इसके कारण वायु में उपस्थित जलवाष्प तेजी से संघनित होकर कोहरे में बदल जाते हैं । कोहरे में उपस्थित पानी के छोटे - छोटे कण दृश्यता को बहुत कम कर देते हैं । प्रायः हम यह देखते हैं कि सामान्य रूप से बड़े - बड़े शहरों में कोहरे की परतें , गांवों व कस्बों में दिखने वाली कोहरे की परतों की अपेक्षा अधिक मोटी होती हैं । 



ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शहरों की वायु में धूल और धुएं के कण अधिक होते हैं , जो कोहरे में उपस्थित पानी के कणों में मिल कर इसको गहरा बना देते हैं । इसी प्रकार के कोहरे को ' धूम्र कोहरा ' कहते हैं । जिन शहरों में धुआं अधिक होता है , वहां कोहरे की घनी परतें दिखाई देती हैं ।


बादल फटना क्या होता है ?


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बादल फटना क्या होता है और यह क्यों फटता है ? 
यह एक तरह का प्राकृतिक आतंक है । मनुष्य डींग हांकता है कि उसमें प्रकृति को वश में करने की शक्ति है पर प्रकृति न कभी किसी के वश में हुई है न होगी । समय - समय पर ये दुर्घटनाएं सब जगह होती रहती हैं । 



कुछ मांस पूर्व हिमाचल प्रदेश में कुल्लू - मनाली की तलहटी गुडसा घाटी के नाले के पास बादल फटा जिसमें बहुत से लोग मारे  गए थे । जन - हानि के सिवा सम्पत्ति की भी बहुत तबाही हुई । विश्व भर में बादल फटने की दुर्घटना सभी जगह होती रहती है ।



अंग्रेजी में इसे " क्लाऊड बर्स्ट ' कहते हैं । इसमें होता क्या है कि अचानक मूसलाधार वर्षा शुरू हो जाती है । मनुष्य सचेत हो सके उससे पहले ही वह धुआंधार पानी से घिर जाता है । उन्हें कुछ सोचने का समय नहीं मिलता । बादल फटना एक तरह से मृत्यु के बुलावे के समान है जैसे बिजली गिरने पर कोई प्राणी नहीं बचता उसी प्रकार यह भी है । 




यह एक ऐसी प्राकृतिक विपत्ति हैं जिसे अग्रिम जाना नहीं जा सकता और न उसे टाला जा सकता है । जिस प्रकार भूकम्प आते हैं , ज्वालामुखी फटते . हैं उसी प्रकार बादल फटते हैं । लगता है कि किसी ने बाढ़ के गेट खोल दिए हैं या टैंक का दरवाजा खोल दिया है । 




मौसम विभाग भी इस बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता । यह सीमित जगह तक जहां तक बादल फैला है । वहीं तक , असर करता है । यह जहां गिरता है टापू सा बन जाता है । आंख झपकते ही मनुष्य के ऊपर टनों बंद पानी आ गिरता है । 




भारत में बादल फटने की दुर्घटनाएं होती ही रहती हैं । ये अधिकतर पर्वतीय क्षेत्रों में ही होती हैं । सन् 1997 में शिमला के पास चडगाव , 2000 में किन्नौर जिले तथा सतलुज नदी के ऊपरी कांठे पर , 2001 में कांगड़ा बैजनाथ गांव पर , 1970 में उत्तरांचल ( तब उ.प्र . ) में बादल फटने की दुर्घटनाएं हुई थीं । 




पूर्व में भी बादल फटने की मिसालें मिलती हैं । 1876 में मेघालय में खासी और जयन्तिया पर्वत श्रेणी में 24 घंटों में 40-41 इंच बरसात हो गई थी । 1995 में चेरापूंजी में एक ही दिन में 60.47 इंच वर्षा हुई थी । ऐसा लगा था मानो किसी ने हौज पाइप खोल दिया है । 1941 में सूरत जिले के धरमपुर गांव में 38.8 , 1949 में मुंबई में 26.9 इंच लगातार वर्षा हुई थी । 




ये सभी बादल फटने की घटनाएं ही थीं । 1988 में किन्नौर जिले में सलिडन गांव में सैंकड़ों लोग मारे गए थे । सन् 2000-2003 के बीच 4 घटनाओं में 600 से अधिक लोग प्राकृतिक आतंक का शिकार बने थे । बादल फटने के कारणों की वैज्ञानिक अपने मतानुसार व्याख्या करते हैं । मौसम विभाग के अधिकारी बताते हैं कि आकाश में पानी भरे बादल एकाएक नीचे गिरते हैं । 




ये अचानक किसी एक ही स्थान तक मर्यादित होते हैं । कई बार नीचे से ऊपर हवा का दबाव होने से वह बादल को बरसने से रोक देती है । मैदान से बढ़कर बादल पर्वतीय हवा से टकराते हैं । तब बिजली - सी कड़कड़ाहट की आवाज होती है । यह बरसात ही है परंतु नीचे की हवा के दबाव के कारण बादल ऊपर ही रहता है और बादल में पानी इकट्ठा हो जाता है । 




ज्यों ही बादल कम होता है बादल अपना दरवाजा सा खोल देता है और बरसात विनाश का दृश्य उपस्थित कर देती है । उससे भयंकर जान और माल की हानि होती है । बादल फटने को रोकने का मनुष्य के पास कोई इलाज नहीं । अकाल मौत का दूसरा नाम बादल फटना है । यह प्राकृतिक विनाशलीला ही है । 




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कोहरा क्या होता है | कोहरा कैसे बनता है | बादल फटना क्या होता है | बादल क्यों फटता है | What is Cloud Burst and Fog Reviewed by Jeetender on October 29, 2021 Rating: 5

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